वापिस – Return

Describing in minimum words, the rarity of the culmination of a spiritual pursuit. Home referring to one’s starting point. Destination is reaching Home again. Pointing to the search of happiness which begins with a journey of searching outward of oneself and culminating it in discovery within one’s self as one’s very nature .

क्या है यह इत्तिफ़ाक़

कि मन्ज़िल आ पहुँचे

वरना घर से तो सब निकले थे !

A difficult translation this is!

What chance is this

That destination is reached

Else,

Everyone left a home!

©️Deepti Vishwanath

मैं कौन हूँ या फिर क्या हूँ मैं?

मैं कौन हूँ या फिर क्या हूँ मैं?

कौन सा प्रश्न है इन्में सही?

कहूँ मैं अगर…

निराकार आयाना हूँ मैं ।

क्या अब आप पहचानोगे मुझे?

आप अपना ही चेहरा

बदल बदल के देखोगे मुझमें!

तब तक … जब तक

अपने को निराकार नहीं देखोगे!

तब तक

बदल बदल के मुझे

अपने को ही देखोगे मुझमें ।

©️दीप्ति विश्वनाथ

Inner Strength

The bloom, the gloom;

The whine, the dine;

Matters it not,

To the sublime.

The pomp, the show;

The shorn, the worn;

Worries it not,

To the refined.

The snout, the pout;

The hop and the shout;

Interests it not.

To those, wisely defined.

To fame, to shame;

To glory. to sorry;

Ignores its call.

The one,

Who shine with the light

Within it all.

– Deepti Vishwanath

शब्द

शब्दों को क्यों हम कुछ कहें,

जब वह तो ख़ुद कुछ कहते ही नहीं ।

जो कहा है;

उसे फिर क्यों हम कहें,

जब पहले भी वह कुछ न कह सके ।

शब्दों मे तो कुछ बात कहॉं;

जब यह जाना ही है,

अब क्यों कुछ हम कहें ।

-दीप्ति विश्वनाथ

सोच – Worry.

सोचते वह है, जो सोचना नहीं है;

सोचते वह नहीं जो सोचना है ।

सोच यह!

अगर सोचना है।

वैसे सोचने को कुछ है ही कहॉं

यह सोच!

जो है, जहॉं सोच कहॉं !

Worrying that; which is not to be worried

Worrying not; what may be to worry!

Worry this!

If you must worry.

Though there is really nothing to worry!

Worry that, if you must worry.

For, what there is, there, there is no worry!

© Deepti Vishwanath