शब्द

शब्दों को क्यों हम कुछ कहें,

जब वह तो ख़ुद कुछ कहते ही नहीं ।

जो कहा है;

उसे फिर क्यों हम कहें,

जब पहले भी वह कुछ न कह सके ।

शब्दों मे तो कुछ बात कहॉं;

जब यह जाना ही है,

अब क्यों कुछ हम कहें ।

 

-दीप्ति विश्वनाथ

 

सोच – Worry.

सोच – Worry.

सोचते वह है, जो सोचना नहीं है;

सोचते वह नहीं जो सोचना है ।

सोच यह!

अगर सोचना है।

वैसे सोचने को कुछ है ही कहॉं

यह सोच!

जो है, जहॉं सोच कहॉं !

 

 

Worrying that; which is not to be worried

Worrying not; what may be to worry!

Worry this!

If you must worry.

Though there is really nothing to worry!

Worry that, if you must worry.

For, what there is, there, there is no worry!

 

© Deepti Vishwanath